Chandrashekhar Azad Jayanti , Birthday , Quotes , Speech , Image Or Photo , Status

महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद को आज पूरा देश याद कर रहा है। उनकी 116वीं जयंती (chandrashekhar azad jayanti) पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें याद किया है।

Chandrashekhar Azad Jayanti

चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को भाभरा गांव में अलीराजपुर रियासत के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सीताराम तिवारी और माता का नाम जागरानी देवी था।1921 में, 15 वर्ष की आयु में, वह असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए।चंद्रशेखर आज़ाद 1925 काकोरी ट्रेन डकैती, लाहौर में जॉन पी. सॉन्डर्स की शूटिंग और भारत के वायसराय की ट्रेन को उड़ाने के प्रयास में शामिल थे।चंद्रशेखर आजाद ने पारसी के जिलाधिकारी न्यायमूर्ति एम.पी. खरेघाट का नाम “आज़ाद”, उनके पिता का नाम “आज़ादी” और उनके निवास स्थान “हवलत” के रूप में।आपको बता दें कि 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में उन्होंने खुद को गोली मार ली थी।

Chandrashekhar Azad आखिर में खुद को मार ली थी गोली

27 फरवरी 1931 का दिन था, जगह थी इलाहाबाद में अल्फ्रेड पार्क। यह दिन चंद्रशेखर का अंतिम दिन था। अंग्रेजों से घिरे आजाद अकेले ही लड़ रहे थे। 15 सैनिकों का सफाया कर दिया गया। एक शपथ के कारण आजाद ने अपनी पिस्तौल से खुद को गोली मार ली, जब लड़कों के पास आखिरी गोली बची थी। उन्होंने कहा था कि मैं आजाद हूं और मरते दम तक आजाद रहूंगा।

चंद्रशेखर को आजाद ही क्यों कहा जाता है ?

चंद्रशेखर आजाद को बुलाने की एक खास वजह भी है। जब वह 15 साल के थे, जब चंद्रशेखर को जज के सामने पेश किया गया, तो उन्होंने कहा- मेरा नाम आजाद है, मेरे पिता का नाम इंडिपेंडेंस है और मेरा घर जेल है। न्यायाधीश चंद्रशेखर पर क्रोधित थे, जिन्होंने उनके सामने इस तरह के बेहूदा जवाब दिए थे, और उन्हें 15 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई थी। हर कोड़े से चमड़ी छिलती रही और उसके मुँह से ‘वन्द मातरम’ की आह निकलती रही। यहीं से उनका नाम ‘आजाद’ पड़ा। वह मरते दम तक आजाद रहे।

Chandrashekhar Azad Jayanti
Chandrashekhar Azad Jayanti

Chandrashekhar Azad Jayanti Quotes

दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे।

आज़ाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे।।

  • मेरा नाम आजाद है, मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता और मेरा घर जेल है।
  • यदि कोई युवा मातृभूमि की सेवा नहीं करता है, तो उसका जीवन व्यर्थ है।
  • मैं एक ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।
  • शत्रु के साथ कैसी नम्रता ? हमारी नम्रता का ही फल है कि आज हमारी मातृभूमि संकट में है।
  • मातृभूमि की इस दुर्दशा को देखकर अगर आपके लहू में क्रोध नहीं है, तो ये पानी है जो आपकी रगों में बह रहा है। ऐसी जवानी का क्या मतलब अगर वो मातृभूमि के काम ना आए।
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